@abdullah_
लीना को अपनी परदादी से एक पुराना विक्टोरियन घर विरासत में मिला था। घर पुराना था — लकड़ी की चटकती ज़मीन, धूलभरी दीवारें और ऊपर की मंज़िल पर एक बहुत बड़ा, प्राचीन शीशा टंगा हुआ था। जब उसने घर खाली करवाया, तो मज़दूरों ने उस शीशे को छूने से मना कर दिया। कहने लगे, "बहुत भारी है", पर लीना को लगा उन्हें उस शीशे से कुछ अजीब सा डर लग रहा था। वो शीशा कुछ अलग था। उसमें अक्स देर से दिखाई देता — थोड़ी देर बाद। इतना कम कि कोई और नोटिस नहीं करता, लेकिन लीना ने कर लिया था। एक रात, वो उस शीशे के पास से गुज़री। उसने खुद को चलने के बाद भी वहीं खड़ा देखा। वो पलटी। फिर से देखा। उसका अक्स मुस्कुरा रहा था। पर लीना ने मुस्कुराया नहीं था। डर के मारे उसने उस रात शीशे को एक मोटे कंबल से ढँक दिया। लेकिन ठीक 3:33 बजे रात को, उसकी आँख खुली। एक धीमी सी आवाज़ आई — थप। कंबल ज़मीन पर पड़ा था। और शीशा अंदर से धुँधला हो गया था — जैसे किसी ने अंदर से साँस ली हो। उस धुँधली सतह पर एक शब्द लिखा था: "रुको।" लीना ने डर के मारे भागने की कोशिश की। जैसे ही वो दरवाज़े पर पहुँची, उसने शीशे की खिड़की में कुछ देखा — हल्की सी हरकत। उसका अक्स अब भ